पर्व
होली
रंगों का पर्व — होलिका दहन की पावन अग्नि, फिर गुलाल और उल्लास का दिन।
बुधवार, 4 मार्च 2026
सोमवार, 22 मार्च 2027
महत्व
होली अहंकार पर भक्ति की विजय का उत्सव है। एक संध्या पूर्व होलिका दहन प्रह्लाद की स्मृति है — वह बालक जो विष्णु-नाम जपना नहीं छोड़ता था और होलिका को भस्म करने वाली अग्नि से सकुशल निकल आया। यह अग्नि वर्ष भर की नकारात्मकता जला देती है।
अगली सुबह रंगों की है। ब्रज में होली कृष्ण से अभिन्न है, जिन्होंने वृंदावन की गोपियों संग होली खेली; उन्हीं की क्रीड़ामय भावना से इस दिन ऊँच-नीच और औपचारिकता घुल जाती है — सब एक ही रंग में रंग जाते हैं।
कैसे मनाते हैं
- होलिका दहन में सम्मिलित हों और प्रार्थना सहित अग्नि की परिक्रमा करें।
- सुबह से गुलाल और रंगों से होली खेलें।
- गुझिया, ठंडाई और पकवान बनाएँ।
- मित्रों-परिजनों से मिलकर रंग और क्षमा का आदान-प्रदान करें।
कृष्ण की प्रार्थनाएँ
हिन्दी
श्री कृष्ण आरती (१)
भगवान नटवर जी की जय-जय गिरिधारी प्रभु,
हिन्दी
श्री कृष्ण आरती (२)
ओम् जय श्री श्याम हरे,
हिन्दी
श्री कृष्ण आरती (३)
आरती युगलकिशोर की कीजै ।
हिन्दी
श्री कृष्ण आरती (४)
आरती कुंजबिहारी की,
हिन्दी
श्री कृष्ण आरती (५)
जय श्रीकृष्ण हरे, प्रभु जय श्रीकृष्ण हरे ।
हिन्दी
श्री कृष्ण आरती (६)
आरती बाल कृष्ण की कीजै,