महत्व

होली अहंकार पर भक्ति की विजय का उत्सव है। एक संध्या पूर्व होलिका दहन प्रह्लाद की स्मृति है — वह बालक जो विष्णु-नाम जपना नहीं छोड़ता था और होलिका को भस्म करने वाली अग्नि से सकुशल निकल आया। यह अग्नि वर्ष भर की नकारात्मकता जला देती है।

अगली सुबह रंगों की है। ब्रज में होली कृष्ण से अभिन्न है, जिन्होंने वृंदावन की गोपियों संग होली खेली; उन्हीं की क्रीड़ामय भावना से इस दिन ऊँच-नीच और औपचारिकता घुल जाती है — सब एक ही रंग में रंग जाते हैं।

कैसे मनाते हैं

  • होलिका दहन में सम्मिलित हों और प्रार्थना सहित अग्नि की परिक्रमा करें।
  • सुबह से गुलाल और रंगों से होली खेलें।
  • गुझिया, ठंडाई और पकवान बनाएँ।
  • मित्रों-परिजनों से मिलकर रंग और क्षमा का आदान-प्रदान करें।

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