श्री विन्ध्येश्वरी मंत्र
ओम् अस्य विंध्यवासिनी मन्त्रस्य
ओम् अस्य विंध्यवासिनी मन्त्रस्य
विश्रवा ऋषि अनुष्टुपछंद: विंध्यवासिनी
देवता मम अभिष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोग: ॥१॥
ओम विश्रवा ऋषये नम: शिरसि
अनुष्टुप छंदसे नम: मुखे
विंध्यवासिनी देवतायै नम: हृदि
विनियोगाय नम: सर्वांगे ॥२॥
एहं हिं अंगुष्ठाभ्यां नम:
यक्षि-यक्षि तर्जनीभ्यां नम:
महायक्षि मध्यमाभ्यां नम:
वटवृक्षनिवासिनी अनामिकाभ्यां नम:
शीघ्रं मे सर्वसौख्यं कनिष्ठिकाभ्यां नम:
कुरू-कुरू स्वाहा करतलकर पृष्ठाभ्यां नम: ॥३॥
अरूणचंदन वस्त्र विभूषितम
सजलतोयदतुल्यन रूरूहाम्
स्मरकुरंगदृशं विंध्यवासिनी
क्रमुकनागलता दल पुष्कराम् ॥४॥
विन्ध्येश्वरी