महत्व

श्रावण पूर्णिमा को बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है — उसकी दीर्घ आयु की प्रार्थना — और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। यह धागा भाई-बहन के बीच रोज़ अनकहे स्नेह को पवित्र रूप दे देता है।

इसी पूर्णिमा को तटीय महाराष्ट्र में नारळी पौर्णिमा मनाते हैं, जब मछली-मौसम से पहले समुद्र देव वरुण को नारियल अर्पित होते हैं; उत्तर में यही श्रावणी उपाकर्म — जनेऊ बदलने — का दिन भी है।

कैसे मनाते हैं

  • बहन आरती उतारे, तिलक करे और राखी बाँधे।
  • भाई उपहार दे और रक्षा का वचन दे।
  • मिठाई बाँटें; कई परिवार दिन का आरंभ छोटी पूजा से करते हैं।
  • समुद्र तट पर वरुण देव को नारियल अर्पित करें (नारळी पौर्णिमा)।

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