पर्व
महाशिवरात्रि
शिव की महान रात — रात्रि जागरण, अभिषेक और "ॐ नमः शिवाय"।
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
शनिवार, 6 मार्च 2027
महत्व
फाल्गुन/माघ की कृष्ण चतुर्दशी की महाशिवरात्रि वह रात है जब शिव ने तांडव — सृष्टि और संहार का ब्रह्मांडीय नृत्य — किया, और अन्य परंपराओं में यही उनके पार्वती से विवाह की रात है। अधिकांश पर्वों से भिन्न, यह भोज का नहीं — व्रत, मौन और जागरण का पर्व है।
भक्त रात के चारों प्रहर जागरण करते हैं, जल, दूध और मधु से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, और बेलपत्र अर्पित करते हैं — हर त्रिदल पत्र तीनों गुणों का उनके चरणों में समर्पण है।
कैसे मनाते हैं
- दिन भर व्रत रखें; कई भक्त केवल जल-फलाहार लेते हैं।
- जल, दूध, मधु और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- "ॐ नमः शिवाय" का जप और शिव चालीसा का पाठ करें।
- रात के चारों प्रहर जागरण करें।
शिव की प्रार्थनाएँ
हिन्दी
श्री शिव आरती (१)
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ।
हिन्दी
श्री शिव आरती (२)
धन धन भोले नाथ तुम्हारे कौड़ी नहीं खजाने में,
हिन्दी
श्री शिव आरती (३)
शीश गंग अर्द्धागड़ पार्वती,
हिन्दी
श्री शिव आरती (४)
आ गई महाशिवरात्रि पधारो शंकर जी ।
हिन्दी
श्री शिव चालीसा
जय गणेश गिरिजा सुवन,
हिन्दी
श्री शिव रुद्रष्य मंत्र
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं