महत्व

फाल्गुन/माघ की कृष्ण चतुर्दशी की महाशिवरात्रि वह रात है जब शिव ने तांडव — सृष्टि और संहार का ब्रह्मांडीय नृत्य — किया, और अन्य परंपराओं में यही उनके पार्वती से विवाह की रात है। अधिकांश पर्वों से भिन्न, यह भोज का नहीं — व्रत, मौन और जागरण का पर्व है।

भक्त रात के चारों प्रहर जागरण करते हैं, जल, दूध और मधु से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, और बेलपत्र अर्पित करते हैं — हर त्रिदल पत्र तीनों गुणों का उनके चरणों में समर्पण है।

कैसे मनाते हैं

  • दिन भर व्रत रखें; कई भक्त केवल जल-फलाहार लेते हैं।
  • जल, दूध, मधु और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • "ॐ नमः शिवाय" का जप और शिव चालीसा का पाठ करें।
  • रात के चारों प्रहर जागरण करें।

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