महत्व

गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता गणेश के जन्म का उत्सव है। मिट्टी की मूर्तियाँ प्राणप्रतिष्ठा के साथ घरों और पंडालों में विराजती हैं, और दस दिनों तक दिनचर्या सुबह-शाम की आरती और गणपति के प्रिय मोदक के भोग के इर्द-गिर्द घूमती है।

पर्व का समापन विसर्जन से होता है: "गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के जयघोष के साथ शोभायात्रा निकलती है और मूर्ति जल में विसर्जित होती है — जो आते हैं वे लौटते भी हैं, और फिर आएँगे।

कैसे मनाते हैं

  • घर में मिट्टी की गणेश मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा करें।
  • 21 मोदक और दूर्वा अर्पित करें; सुबह-शाम आरती करें।
  • गणेश आरती और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
  • अनंत चतुर्दशी को विसर्जन यात्रा में सम्मिलित हों।

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