श्री चित्रगुप्त आरती (१)
श्री विरंचि कुलभूषण, यमपुर के धामी ।
श्री विरंचि कुलभूषण, यमपुर के धामी ।
पुण्य पाप के लेखक, चित्रगुप्त स्वामी ॥
सीस मुकुट, कानों में कुण्डल अति सोहे ।
श्यामवर्ण शशि सा मुख, सबके मन मोहे ॥
भाल तिलक से भूषित, लोचन सुविशाला ।
शंख सरीखी गरदन, गले में मणिमाला ॥
अर्ध शरीर जनेऊ, लंबी भुजा छाजै ।
कमल दवात हाथ में, पादुक परा भ्राजे ॥
नृप सौदास अनर्थी, था अति बलवाला ।
आपकी कृपा द्वारा, सुरपुर पग धारा ॥
भक्ति भाव से यह आरती जो कोई गावे ।
मनवांछित फल पाकर सद्गति पावे ॥
चित्रगुप्त की और प्रार्थनाएँ
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श्री चित्रगुप्त अरोग्य मंत्र
ॐ नमः चित्रगुप्ताय शान्ताय सर्व रोग विनाशने
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श्री चित्रगुप्त आरती (२)
ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे ।
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श्री चित्रगुप्त गायत्रीमंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः
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श्री चित्रगुप्त चालीसा (१)
सुमिर चित्रगुप्त ईश को,
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श्री चित्रगुप्त चालीसा (२)
मंगलम मंगल करन,
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श्री चित्रगुप्त जपमंत्र
ॐ नमो विचित्राय धर्मलेखाकाय