श्री चंद्रदेव आरती (२)

ॐ जय सोम देवा,

ॐ जय सोम देवा,
स्वामी जय सोम देवा ।

दुःख हरता सुख करता,
जय आनन्दकारी ।

रजत सिंहासन राजत,
ज्योति तेरी न्यारी ।

दीन दयाल दयानिधि,
भव बन्धन हारी ।

जो कोई आरती तेरी,
प्रेम सहित गावे ।

सकल मनोरथ दायक,
निर्गुण सुखराशि ।

योगीजन हृदय में,
तेरा ध्यान धरें ।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव,
सन्त करें सेवा ।

वेद पुराण बखानत,
भय पातक हारी ।

प्रेमभाव से पूजें,
सब जग के नारी ।

शरणागत प्रतिपालक,
भक्तन हितकारी ।

धन सम्पत्ति और वैभव,
सहजे सो पावे ।

विश्व चराचर पालक,
ईश्वर अविनाशी ।

सब जग के नर नारी,
पूजा पाठ करें ।