पर्व
मकर संक्रांति
सूर्य का उत्तरायण — पतंगें, तिल-गुड़ और पवित्र स्नान।
बुधवार, 14 जनवरी 2026
शुक्रवार, 15 जनवरी 2027
महत्व
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण के आरंभ का पर्व है — सौर पंचांग से जुड़े गिने-चुने हिन्दू पर्वों में एक। यह सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता है: कटी फ़सल और लौटते लंबे दिनों के लिए।
हर प्रदेश इसे अपने रंग में मनाता है — दक्षिण में पोंगल, पंजाब में एक रात पहले लोहड़ी, गुजरात के आसमान में पतंगें, और महाराष्ट्र में तिल-गुड़: "तिळगूळ घ्या, गोड गोड बोला।"
कैसे मनाते हैं
- भोर में नदी स्नान करें; सूर्य को अर्घ्य दें।
- सूर्य मंत्र या आदित्य हृदय का पाठ करें।
- तिल-गुड़ बाँटें।
- पतंग उड़ाएँ; खिचड़ी, तिल और गर्म वस्त्रों का दान करें।
सूर्य की प्रार्थनाएँ
हिन्दी
श्री सूर्यदेव आरती (१)
ऊँ जय सूर्य भगवान,
हिन्दी
श्री सूर्यदेव आरती (२)
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।
हिन्दी
श्री सूर्यदेव आरती (३)
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव ।
हिन्दी
श्री सूर्यदेव चालीसा (१)
श्री रविहरत आ होरात तमे,
हिन्दी
श्री सूर्यदेव चालीसा (२)
कनक बदन कुण्डल मकर,
हिन्दी
श्री सूर्यदेव मंत्र
ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं ।