पर्व
दीपावली
प्रकाश का पर्व — लक्ष्मी पूजा, हर द्वार पर दीप, और नई शुरुआत।
रविवार, 8 नवंबर 2026
महत्व
दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व है। यह चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति है — नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। यही रात लक्ष्मी पूजा की भी है, जब धन की देवी उन घरों में पधारती हैं जो स्वच्छ, आलोकित और स्नेहमय हों।
कार्तिक की अमावस्या — माह की सबसे अंधेरी रात — को पड़ने वाली दीपावली के दीपों की पंक्तियाँ यही सिखाती हैं कि गहनतम अंधकार को हराने के लिए एक लौ ही पर्याप्त है।
कैसे मनाते हैं
- घर की सफ़ाई कर रंगोली, तोरण और दीपों की पंक्तियों से सजाएँ।
- संध्या में लक्ष्मी पूजा करें, सर्वप्रथम गणेश जी की वंदना के साथ।
- लक्ष्मी आरती का पाठ करें, मिठाई, खील-बताशे अर्पित करें।
- परिवार और पड़ोसियों से उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान करें।
- रात भर द्वार और खिड़कियों पर दीप जलाए रखें।
लक्ष्मी की प्रार्थनाएँ
हिन्दी
श्री लक्ष्मी आरती (१)
जय लक्ष्मी रमणा श्री जय लक्ष्मी रमणा,
हिन्दी
श्री लक्ष्मी आरती (२)
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
हिन्दी
श्री लक्ष्मी गणेश मंत्र
ॐ प्रकृत्यै नमः ॥१॥
हिन्दी
श्री लक्ष्मी चालीसा
मातु लक्ष्मी करि कृपा,
हिन्दी
श्री लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद