महत्व

दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व है। यह चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति है — नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। यही रात लक्ष्मी पूजा की भी है, जब धन की देवी उन घरों में पधारती हैं जो स्वच्छ, आलोकित और स्नेहमय हों।

कार्तिक की अमावस्या — माह की सबसे अंधेरी रात — को पड़ने वाली दीपावली के दीपों की पंक्तियाँ यही सिखाती हैं कि गहनतम अंधकार को हराने के लिए एक लौ ही पर्याप्त है।

कैसे मनाते हैं

  • घर की सफ़ाई कर रंगोली, तोरण और दीपों की पंक्तियों से सजाएँ।
  • संध्या में लक्ष्मी पूजा करें, सर्वप्रथम गणेश जी की वंदना के साथ।
  • लक्ष्मी आरती का पाठ करें, मिठाई, खील-बताशे अर्पित करें।
  • परिवार और पड़ोसियों से उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान करें।
  • रात भर द्वार और खिड़कियों पर दीप जलाए रखें।

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