महत्व

दीपावली के छठे दिन मनाई जाने वाली छठ हिन्दू व्रतों में सबसे कठोर मानी जाती है — संतान और परिवार के कल्याण के लिए सूर्यदेव और छठी मैया का चार दिवसीय व्रत। व्रती निर्जला उपवास रखते हैं, नदी-तालाबों में कमर तक खड़े होते हैं, और पहले अस्ताचल फिर उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

डूबते सूर्य को उगते से पहले अर्घ्य — यही उलटफेर छठ की विशिष्ट सीख है: कृतज्ञता उतार में भी उतनी ही, जितनी चढ़ाव में। पर्व का हृदय बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई है, पर अब इसके घाट दुनिया भर के शहरों में सजते हैं।

कैसे मनाते हैं

  • नहाय-खाय: पवित्र स्नान और एक सादा भोजन — व्रत का आरंभ।
  • खरना: दिन भर का उपवास, संध्या को गुड़ की खीर से पारण।
  • जल में खड़े होकर अस्ताचल सूर्य को संध्या अर्घ्य दें।
  • उदयाचल सूर्य को उषा अर्घ्य देकर 36 घंटे का व्रत खोलें।

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